hindi poet nagarjun Death anniversary today – जनकवि नागार्जुन पुण्यतिथि पर पढ़ें उनकी 5 कविताएं, Hindi News

आज भारत के जनवकि नागार्जुन की पुण्यतिथि है। नागार्जुन को आधुनिक कवि भी कहा जाता है। नागार्जुन ऐसे कवि थे जिनकी कविताओं में संस्कृत, बांग्ला, मैथिली और हिंदी कविता की परंपरा का मेल देखा जा सकता है। नागार्जुन ने प्रकृति, प्रेम, राजनीति जैसे सभी विषयों पर कविता लिखी है। उन्होंने कटहल, नेवला जैसे विषयों पर भी कविता लिखी थी। जिन्हें आमतौर पर कविता का विषय नहीं समझा जाता था। नागार्जुन की कविताएं आज भी काफी लोकप्रिय हैं।

नागर्जुन ने 5 नबंबर 1998 को 87 साल की उम्र में अंतिम सांस ली लेकिन उनकी कविताएं आज भी हमारे जहन में जिंदा है। तो चलिए उनकी ऐसी ही पांच कविताएं बताते हैं। जिसकी वजह से उन्हें जनकवि कहा जाता है।

जनता मुझसे पूछ रही है क्या बतलाऊं
जन कवि हूं मैं साफ कहूंगा क्यों हकलाऊं

रोजी-रोटी हक की बातें जो भी मुंह पर लाएगा
कोई भी हो निश्चय ही वो कम्युनिस्‍ट कहलाएगा
दो हज़ार मन गेहूं आया दस गांवों के नाम

बापू के भी ताऊ निकले तीनों बन्दर बापू के !
सरल सूत्र उलझाऊ निकले तीनों बन्दर बापू के !
सचमुच जीवनदानी निकले तीनों बन्दर बापू के !
ज्ञानी निकले, ध्यानी निकले तीनों बन्दर बापू के!
जल-थल-गगन-बिहारी निकले तीनों बन्दर बापू के!
लीला के गिरधारी निकले तीनों बन्दर बापू के!

क्या हुआ आपको, क्या हुआ आपको
सत्ता के नशे में भूल गई बाप को
इन्दु जी इन्दु जी क्या हुआ आपको

पांच पूत भारत माता के, दुश्मन था खूंखार
गोली खाकर एक मर गया बाकि रह गये चार
चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन
देश-निकाला मिला एक को, बाक़ी रह गए तीन
तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गए वो
अलग हो गया उधर एक, अब बाक़ी बच गए दो
 

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