Prevention of arrest in an SC/ST Act and Rape accused granted bail – एससी-एसटी ऐक्ट में आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक, मिली अग्रिम जमानत भी, Hindi News

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एससी-एसटी ऐक्ट और रेप के आरोपी युवक की गिरफ्तारी पर रोक लगा कर उसे अग्रिम जमानत दे दी दी। कहा है कि उस पर एससी-एसटी ऐक्ट, 1989 के तहत आरोप गलत तरीके से लगाए गए हैं। 

न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और एम.आर. शाह की पीठ ने यह आदेश देते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि एससी-एसटी ऐक्ट में आरोपी को अग्रिम जमानत देने का प्रावधान नहीं है। पीठ के याचिकाकर्ता आरोपी ने धारा 376 के तहत दायर की गई एफआईआर में उसका नाम इस आधार पर लिखा गया है उसने शिकायतकर्ता के साथ शादी करने का बहाना बनाकर सहमति से यौन संबंध बनाए। बाद में उसपर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत भी आरोप लगा दिए गए क्योंकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति से संबंध रखती है। उसने दावा किया कि इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी।

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उसने कहा कि शिकायतकर्ता उस पर दबाब बना रही थी कि यदि उसकी मांगे पूरी नहीं की गई तो उस पर और केस लगा दिए जाएंगे। पहले उसने रेप का आरोप लगाया और उसके बाद एससी-एसटी ऐक्ट का आरोप लगाकर केस दर्ज करवा दिया। उसने कहा कि एससी-एसटी ऐक्ट के आरोप के बारे में उसके पास कोई सबूत नहीं है न ही रेप की एफआईआर में उसने इस बारे में कुछ कहा है। उसने कभी उसे प्रताड़ित नहीं किया। 

इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए वह पहले ट्रायल कोर्ट में गया लेकिन वहां से उसे कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी उसकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट आया। 

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